सन्त निरंकारी मण्डल के तत्वावधान में भारत के हरियाणा स्थित समालखा में संपन्न हुए 79वें अंतर्राष्ट्रीय वार्षिक संत समागम के पश्चात, नेपाल कि कैलाली जिला स्थित टीकापुर सत्संगत भवन में पहलीबार सत्संगत का आयोजन किया गया ।
सन्त निरंकारी मण्डल के अध्यक्ष एवं नेपाल प्रभारी नर बहादुर रावल के मुख्य आतिथ्य में यह सत्संगत कार्यक्रम संपन्न हुआ ।
कार्यक्रम के दौरान नेपाल प्रभारी नर बहादुर रावल ने 79वें संत समागम के मुख्य ध्येय 'जागृति' पर प्रकाश डालते हुए हरदेव वाणी के 41वें श्लोक की व्याख्यात्मक प्रवचन के माध्यम से सत्संगत को दिशा-निर्देशित किया । सत्संगत मे स्टेजका जिम्मेवारी समालते हुए प्रभारी रावल ने कहा, "भक्ति का अर्थ घर-परिवार, समाज और अपनी जिम्मेदारियों से भागना या उनका त्याग करना नहीं है, बल्कि दैनिक जीवन के कर्तव्यों को पूरा करते हुए ईश्वरीय चेतना से जुड़ना है । संतों, गुरुओं और अवतारों ने भी कभी अपने पारिवारिक तथा सामाजिक उत्तरदायित्वों को नहीं छोड़ा, बल्कि उन्हीं के बीच रहकर निष्काम कर्म किया । अतः ईश्वर की सच्ची पहचान और ज्ञान प्राप्त करके अपने कर्तव्यों का निर्वाह करना ही वास्तविक भक्ति यानी 'जागृति' है ।"
प्रभारी रावल ने 'जागृति' के संबंध में आगे कहा कि भक्ति का अर्थ संसार से विरक्त होकर जंगल जाना या जिम्मेदारियों से दूर होना नहीं है, बल्कि मन में ईश्वर के प्रति श्रद्धा रखते हुए अपने दैनिक कर्म करना है । ईश्वर सर्वव्यापक हैं, इसलिए उन्हें स्मरण करने या ध्यान लगाने के लिए किसी निश्चित स्थान या संन्यासी बनने की आवश्यकता नहीं है । जहाँ भी रहें, शुद्ध मन से उनका ध्यान और भक्ति की जा सकती है ।
अपने आध्यात्मिक प्रवचन में नेपाल प्रभारी रावल ने इस बात पर भी जोर दिया कि इतिहास के महान गुरुओं, पीर-पैगंबरों और अवतारों ने भी गृहस्थ आश्रम को कभी बंधन या बाधा नहीं माना । उन्होंने अपने पारिवारिक तथा सामाजिक दायित्वों को कुशलतापूर्वक निभाया था । हाथों से ईमानदारी पूर्वक कर्म करना और मन को प्रभु में लीन रखना ही गृहस्थ जीवन का सबसे बड़ा धर्म है । अंधविश्वास या ज्ञान के बिना की जाने वाली भक्ति की अपेक्षा ईश्वर के वास्तविक स्वरूप और ज्ञान की पहचान करके की गई भक्ति ही अधिक फलदायी होती है ।
निराजन बोहरा द्वारा हरदेव वाणी के श्लोक से आरंभ हुए इस सत्संगत कार्यक्रम में सन्त निरंकारी मण्डल नेपाल के केंद्रीय सदस्य एवं सेवादल संचालक नर बहादुर बटाला, मण्डल के केंद्रीय सलाहकार तथा केंद्रीय कार्यालय सचिव श्रीराम काफ्ले, सन्त निरंकारी मण्डल के मीडिया प्रतिनिधि एवं 'माण्डव्य टाईम्स' के प्रकाशक-समाचार संयोजक हेमन्त माण्डव्य, सन्त निरंकारी भवन टीकापुर के मुखी महादेव भंडारी, सेवादल दीपक रावल, प्रकाशमान ठकुल्ला, नर बहादुर जी, अछाम के मुखी सूरत सोडारी, पूर्व ज्ञानप्रचारक पूर्ण बहादुर स्वार, सेवादल शिक्षक चंद्र सिंह भुल के साथ-साथ हर्क बहादुर रावल, कृष्ण प्रसाद आचार्य, यशोदा जी और आयुष्मान ठकुल्ला ने आध्यात्मिक जागृति पर अपने-अपने विचार व्यक्त किए ।
इसी प्रकार, प्रसन्न बटाला, शंकर भुल, तनिष टमटा, भगवती बहन, इंद्र सिंह और मोहन सिंह ने भक्ति गीतों के माध्यम से सत्संगत में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं के मन को प्रफुल्लित करते हुए आध्यात्मिक भावनाओं को उजागर किया ।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में नैन सिंह जी ने प्रार्थना (मंगलाचरण) कराई, जबकि बलिया मोतीपुर कैलाली से पधारीं करुणा और हिमानी बहन ने स्टेज से दिए गए प्रवचन के पश्चात सिमरन (धुन) का गायन किया ।