आईतवार, श्रावन ३१, २०८३
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मुक्ति पर्व दिवस संपन्न, दिवंगत महात्माओं का स्मरण करते हुए योगदान को किया गया याद
१५ अगस्त, २०२६(३० श्रावण २०८३)
  माण्डव्य हेमन्त
कैलाली जिले के टीकापुर नगरपालिका स्थित संत निरंकारी सत्संग भवन में आज 'मुक्ति पर्व दिवस' अत्यंत भव्यता के साथ मनाया गया। इस विशेष अवसर पर विभिन्न भजनों और प्रवचनों के माध्यम से एक विशाल सत्संग कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
​निरंकारी मिशन के ज्ञान प्रचारक महात्मा नवल सिंह बोहरा जी के मुख्य आतिथ्य में यह वृहद सत्संग कार्यक्रम संचालित हुआ। मुक्ति पर्व कार्यक्रम में निरंकारी मिशन के अनुयायियों की भारी उपस्थिति रही। इस दौरान 'मुक्ति पर्व' के महत्व पर प्रकाश डालते हुए विभिन्न वक्ताओं ने अपने विचार, भजन और प्रवचन के माध्यम से प्रस्तुत किए।
​निरंकारी मिशन के अनुयायी इस दिवस को 'मुक्ति पर्व' के रूप में क्यों मनाते हैं, इसके पीछे का मुख्य कारण यह है कि निरंकारी मिशन के बाबा अवतार सिंह जी महाराज की धर्मपत्नी (जिन्हें जगतमाता के रूप में भी जाना जाता है) बुद्धवंती जी का देहान्त सन् १९६४ में १५ अगस्त के दिन हुआ था। उनके साथ-साथ निरंकारी मिशन के दूसरे सतगुरु बाबा अवतार सिंह जी, मिशन के प्रधान लाभ सिंह जी, राजमाता कुलवंत कौर जी, सतगुरु माता सविन्दर हरदेव सिंह जी और विभिन्न समयों में मिशन में योगदान देने वाले सभी कर्मठ अनुयायियों की याद तथा उनकी प्रेरणा को आत्मसात करते हुए प्रत्येक वर्ष १५ अगस्त को निरंकारी अनुयायी इस दिन को 'मुक्ति पर्व' के रूप में मनाते हैं।
​टीकापुर स्थित निरंकारी भवन सहित नेपाल के विभिन्न जिलों में स्थित निरंकारी सत्संग भवन में भी यह पर्व इसी अनुरूप मनाया गया। नेपाल, भारत और दुनिया के अन्य विभिन्न देशों में भी इस दिवस को एक विशेष आध्यात्मिक पर्व के रूप में वृहद कार्यक्रमों का आयोजन कर मनाया जाता है।
​मुक्ति पर्व के अवसर पर आयोजित विशेष सत्संग कार्यक्रम में ज्ञान प्रचारक महात्मा नवल सिंह बोहरा ने कहा कि मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य मुक्ति प्राप्त करना है। उन्होंने ब्रह्मज्ञान के मार्ग पर चलते हुए जीवन जीते हुए ही मुक्ति के मार्ग पर अग्रसर होने पर विशेष बल दिया।
​सत्संग को संबोधित करते हुए महात्मा बोहरा ने बताया कि संसार में समय-समय पर आए संतों, महात्माओं, पीर-पैगंबरों और आध्यात्मिक महापुरुषों ने हमेशा मानव जाति को मुक्ति प्राप्ति का मार्ग दिखाया है। उन्होंने संत निरंकारी मिशन के बाबा बुटा सिंह जी, बाबा अवतार सिंह जी, बाबा गुरबचन सिंह जी, बाबा हरदेव सिंह जी तथा सतगुरु माता सविन्दर हरदेव सिंह जी आदि सतगुरुओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इन्होंने इंसानों को मानव रूप में रहते हुए प्रेम, सेवा, सद्भाव और समर्पण के साथ जीवन जीते हुए मुक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया है।
​इस कार्यक्रम में नेपाली ज्ञान प्रचारक लाल बहादुर कुमाल, उजीर सिंह बिक, नैन सिंह बिक, रन सिंह बिक, नेपाल के ज्ञान प्रचारक खड़क बहादुर शाह, कृष्ण प्रसाद रेग्मी, धन सिंह रावल, नवल सिंह बिष्ट, चंद्र सिंह विष्ट, नन्दलाल जोशी, कृष्ण बहादुर श्रेष्ठ तथा मुखी महात्मा शिव प्रसाद भण्डारी, कर्ण बहादुर शाह, सर्प सिंह बटाला, लाल सिंह चनारा, निर्मल साउद, लक्ष्मी प्रसाद जैसी सहित अनेक निरंकारी महात्माओं ने इस संसार से निराकार में ब्रह्मलीन हुए सभी दिवंगतों को स्मरण करते हुए उनके योगदान को याद किया।
​कार्यक्रम के दौरान अक्षय ओड, टेक बहादुर, गगन बिक, प्रह्लाद बिक रंगीला, करी सिंह बिक, भान सिंह भण्डारी, मोहन सिंह ओड, भगवती बिक, लक्ष्मी सोनी, जुनी रावल, प्रह्लाद रावल, मरिचमान भूल, सन्त निरंकारी मिसन के नेपाल प्रशासनिक प्रमुख श्रीराम काफ्ले, बीमा माता, मुखी महात्मा महादेव भण्डारी, सेवादल संचालक वजीर सिंह भूल, प्रसन्न बटाला, सीता भण्डारी, लौट्न चौधरी, बल बहादुर रावल, मनीष खड्का, जैरुप चुनारा, लाल बहादुर टमट्टा (मुम्बई ठाणे), शेर सिंह (मुम्बई), टेक बहादुर थापा और गोविन्द बिक (सूरत) आदि ने भजन एवं प्रवचन के माध्यम से मुक्ति पर्व दिवस की महत्ता को स्पष्ट किया।
​कार्यक्रम का संचालन सेवादल के चंद्र सिंह भूल द्वारा किया गया।
माण्डव्य हेमन्त

हेमन्त माण्डव्य

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